Friday, 29 June 2018

किडनी फेल होने के उपाय..

कुछ विशेष योगासन व प्राणायाम से अपनी किडनी को फेल होने से बचाईये..
  
👉आंकड़ों के अनुसार अकेले भारत में हर 5 मिनट में, 2 मौत सिर्फ किडनी की बीमारी से हो रही है और इन आकड़ों में अधिकता शहरों में रहने वाले ऐसे लोगों की है जो डायबिटिज या हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं | आईये सबसे पहले जानने की कोशिश करतें हैं उन सभी कारणों के बारें में विस्तार से, जो किसी भी स्त्री / पुरुष की किडनी ख़राब कर सकतें हैं | सभी संभावित कारणों को जानना इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि इनमें से जितने अधिक कारणों से मरीज जितना ज्यादा बचाव करेगा उसे उतना ही जल्दी लाभ मिलेगा !
किडनी खराब होने के मुख्यतः निम्नलिखित 4 कारण है-
👉1 – पहला कारण है ऐसी चीजों को अक्सर खाना या पीना जो आसानी से नहीं पच पाती है | इसमें मुख्यतः आजकल के अधिकाँश रिफाइंड आयल हैं जिनके बारे में अधिकतर बड़ी से बड़ी कंपनियां भी यह सच्चाई जानबूझकर छुपाती हैं कि उनके रिफाइंड आयल आसानी से पच नहीं सकते क्योंकि यही देखने को मिलता है कि इन रिफाइंड आयल्स मे से कोलेस्ट्राल निकालने की कृत्रिम रासायनिक प्रक्रिया अपनाने की वजह से ये बहुत हानिकारक हो जातें है जिनका सीधा बुरा असर पड़ सकता है लीवर, किडनी व हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर |

👉स्वर्गवासी क्रांतिकारी भाई राजीव दीक्षित (rajiv dixit) जी ने भी अपने अथक परिश्रम से यही पहलू खोज निकाला था कि बाजार में बिकने वाले महंगे से महंगे रिफाइंड आयल से भी देर सवेर कोई ना कोई हृदय रोग (जैसे ब्लड प्रेशर, ब्लोकेज आदि) होना तय है, इसलिए इन रिफाइंड आयल्स के इमोशनल व साइंटिफिक दिखने वाले टीवी एडवरटीजमेन्ट्स से प्रभावित होकर इन्हें खाने की भूल करना ठीक उसी तरह है जैसे बढियां शानदार पैकिंग के अंदर बंद स्लो पाइजन को खाना | अतः वास्तविक भलाई इसी में है कि आज के इम्मेच्योर मॉडर्न मेडिकल साइंस की सलाह को ना मानते हुए, केवल अनंत वर्ष पुराने हिन्दू धर्म के आयुर्वेद ग्रन्थ की सलाह अनुसार शुद्ध सरसों के तेल या देशी गाय माता के दूध से बने घी का ही इस्तेमाल, खाना पकाने के लिए करना चाहिए |

👉रिफाइंड आयल के अलावा ज्यादा मसालेदार, ज्यादा तीता या ज्यादा खट्टा या ज्यादा मीठा (अधिक शूगर लेवल युक्त), किसी भी तरह का नशा (जैसे शराब, बियर, तम्बाखू, सिगरेट, बीड़ी, चरस आदि), ज्यादा गरिष्ठ (जैसे ज्यादा घी, तेल, मक्खन आदि का इस्तेमाल जो ब्लडप्रेशर बढ़ा सकता है), ज्यादा नमक, चाय कॉफ़ी जैसे उत्तेजक पदार्थों का अति सेवन, कोल्ड ड्रिंक्स, पेस्टिसाइडस युक्त सब्जियां फल या मिलावटी खाद्य पदार्थ आदि खाने से भी किडनी खराब हो सकती है |

जरूरत से कम पानी पीने से भी किडनी ख़राब होती है |

👉बाजार में बिकने वाले लगभग सभी मांस व अंडे (chicken, flesh, lamb, meat, fish, mutton, pork, ham, egg) ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की वजह से जल्दी जल्दी बड़े हुए जानवरों का होता है इसलिए इससे भी किडनी बहुत तेज ख़राब होती है | अण्डों से खासकर किडनी में इन्फेक्शन पैदा होते हुए देखा गया है |

👉आजकल लगभग हर पानी का नेचुरल स्रोत (जैसे नदी, समुद्र, नहर, तालाब आदि) इतना ज्यादा विषाक्त हो चुका है कि कोई भी इन्सान अगर इनका पानी बिना वाटर फ़िल्टर से साफ़ किये हुए डायरेक्ट पी ले तो उसकी तबियत तुरंत ख़राब हो सकती है, अतः ऐसे ही जल स्रोत के पानी का निरंतर सेवन करने वाली मछलियों को खाने से भी किडनी खराब होती है |

👉बाजार में बिकने वाले फास्ट फ़ूड (जैसे पिज्जा, बर्गर, चिप्स, ब्रेड, स्नेक्स, नमकीन, चोकलेट्स, टॉफी, नूडल्स, समोसे, जलेबी, पकोड़े आदि) का रेगुलर सेवन के अलावा डिब्बा बंद खाने पीने का सामान (जैसे फ्रोजेन मील आदि, जिसमें लम्बे समय तक सड़ने से बचाने के लिए केमिकल युक्त प्रेजर्वेटिव मिलाया जाता है) को भी बार बार खाने से किडनी खराब हो सकती है |

👉नियमित रूप से बासी खाने या गंदगी युक्त खाना खाने से भी किडनी खराब हो सकती है क्योंकि बासी खाने में कई तरह के हानिकारक जीवाणु पनपने लगतें हैं जिन्हें नंगी आँख से तो नहीं देखा जा सकता है, लेकिन ऐसे जीवाणु युक्त बासी खाना शरीर में जाकर विभिन्न तरह के इन्फेक्शन पैदा करता है |

👉ज्यादा मेकअप करने से भी किडनी ख़राब हो सकती है क्योंकि जैसे जड़ीबूटी युक्त तेल या घी की शरीर पर मालिश करने से शरीर की असाध्य बीमारियों में लाभ मिलता है, ठीक उसी तरह केमिकल युक्त विभिन्न कॉस्मेटिक्स (जैसे पाउडर, लिपस्टिक, क्रीम, साबुन, शैम्पू आदि) को शरीर पर रोज लगाने से, उनकी सूक्ष्म मात्रा पसीने की ग्रंथियों के माध्यम से शरीर के अंदर जाती रहतीं है जो देर सवेर किडनी को क्षति पंहुचा सकती है |

👉जो स्त्री पुरुष कपड़ों को साफ़ करने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल युक्त डिटर्जेंट (चाहे वो कितने भी नामी गिरामी कंपनी के महंगे डिटर्जेंट हों) को पानी से अच्छे से धोकर कपड़े से बाहर नहीं निकाल देते हैं, उनके कपड़ों से पसीना घुलकर हानिकारक टोक्सिंस को लगातार शरीर के अंदर सोखता रहता है, जिसका देर सवेर किडनी पर बुरा असर पड़ता ही है ! अतः इसी लिए कहा जाता है कि सिर्फ प्राकृतिक चीजों से बनी सामग्री का इतेमाल करना चाहिये ।।

👉ठीक इसी तरह बर्तन धोने के लिए भी सिर्फ नेचुरल चीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए ताकि अगर बर्तन की सफाई ठीक से ना हो पाई हो तो डिटर्जेंट का सूक्ष्म अंश खाने में घुलकर पेट में पहुच कर विभिन्न तरह के इन्फेक्शन पैदा ना करे |

👉प्लास्टिक व एलुमिनियम के बर्तन में भी गर्म खाने पीने का सामान रख कर खाने से लीवर व किडनी पर बुरा असर पड़ता है |

👉एलोपैथिक दवाओं के सेवन से भी किडनी ख़राब हो सकती है ! कुछ एलोपैथिक दवाएं तो इतनी ज्यादा तेज और खतरनाक होतीं हैं कि उनके सिर्फ एक या दो बार ही सेवन करने से किडनी में भयंकर इन्फेक्शन होते हुए देखा गया है |

👉लगभग हर छोटे से छोटी और महंगे से महंगी एलोपैथिक टेबलेट, कैप्सूल, सिरप आदि (चाहे वो एलोपैथिक दवा शूगर कण्ट्रोल के लिए हो या ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल के लिए, चाहे वो एलोपैथिक दवा गर्भ निरोध के लिए हो या यौन शक्ति बढ़ाने के लिए, चाहे वो एलोपैथिक दवा कैंसर जैसी बड़ी बीमारी के लिए हो या जुकाम जैसी छोटी बिमारी के लिए, चाहे वो शरीर की प्रोटीन विटामिन्स आयरन कैल्शियम आदि बढ़ाने वाली सिरप टॉनिक व टेबलेट्स हों या कोई प्रसिद्ध पेन किलर हो, चाहे वह कोई फेमस कंपनी का माउथ फ्रेशनर, टूथ पेस्ट हो या पेट कब्ज गैस के लिए रोज खाने वाली दवा, चाहे वो थायराइड के लिए ली जाने वाली रोज की टेबलेट हो या किसी एलर्जी के लिए जाने वाली रोज की दवा) के साइड इफेक्ट्स तुरंत गूगल (Google) पर सर्च कर आसानी से देखा जा सकता है, और सच्चाई पता लगने पर एक बार तो पैर तले जमीन खिसक सकती है (इसी वजह से एलोपैथी के साइड इफेक्ट्स से त्रस्त जनता अब इसे शैतानी पैथी कहने लगी है) |

👉जैसे प्राप्त जानकारी अनुसार आजकल महिलाओं में संतानोत्पादन में आ रही समस्या के पीछे एक मुख्य वजह गर्भ निरोध के लिए ली जाने वाली एलोपैथिक दवाएं भी हैं जिनका रेगुलर सेवन महिलाओं में आंशिक या पूर्ण बांझपन (barrenness, sterility, infertility) के दोष उत्पन्न कर सकता है इसलिए हर बुद्धिमान व्यक्ति यही सलाह देता है कि जब तक कोई आकस्मिक समस्या (जैसे हार्ट अटैक, एक्सीडेंट, कोई तेज दर्द आदि) ना हो तब तक अपनी हर बिमारी का इलाज सिर्फ योग आयुर्वेद से ही खोजने का प्रयास करना चाहिए (और दुनिया में कौन सी बीमारी ऐसी है जिसका योग आयुर्वेद में इलाज ना हो, बशर्ते कि योग आयुर्वेद के सही जानकार से मरीज की मुलाक़ात हो पाए) |

👉कुल मिलाकर किडनी की बिमारी के रेफेरेंस में निष्कर्ष यही है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी चीजों को रोज खा या पी रहा हैं जिन्हें पचाने के लिए शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है तो निश्चित रूप से वह अपनी किडनी को रोज कमजोर ही कर रहा है !

👉2 – किडनी खराब होने का दूसरा मुख्य कारण है – अनियमित दिनचर्या मतलब खाने, पीने, एक्सरसाइज, सोने, जागने, मल त्यागने आदि का समय रोज बदलते रहना | वास्तव में मानव शरीर की मूलभूत अनिवार्य आवश्यकताओं (जैसे – खाने, पीने, एक्सरसाइज, सोने, जागने, मल त्यागने आदि) का समय रोज रोज बदलने से मानव शरीर की पूरी रोग प्रतिरोधक क्षमता ही धीरे धीरे कमजोर पड़ने लगती है जिसकी वजह से किडनी, लीवर, हार्ट, ब्रेन, फेफड़े (important organs like heart liver kidney brain lungs disease) जैसे अहम अंगों पर बुरा असर पड़ता है !

👉3 – तीसरा कारण अलग से मेंशन करना इसलिए जरूरी है क्योंकि अच्छे से अच्छे पढ़े लिखे लोगों तक को भी नहीं पता होता है कि प्रतिदिन सिर्फ एक्सरसाइज ना करने से किडनी भी खराब हो सकती है |

👉एक्सरसाइज ना सिर्फ एक्स्ट्रा कैलोरी को खर्च करती है बल्कि स्ट्रेस को भी खर्च करती है मतलब नियमित एक्सरसाइज तनाव से मुक्ति भी दिलाती है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने नहीं पाता है जो कि किडनी खराब होने का एक अहम कारण भी है |

👉अगर कोई गृहस्थ व्यक्ति, सच्चे योगी (Indian Yogi, Sadhu, Sant, sanyasi) की तरह सिर्फ फलाहार करने की बजाय, अन्न भी रोज खाता है व कोई विशेष शारीरिक मेहनत भी नहीं करता है और साथ ही साथ प्राकृतिक वातावरण से अधिकांश समय दूर रहकर एक कृत्रिम माहौल (जैसे एयर कंडीशन घर) में रहकर रोज बहुत तनाव (negative thoughts like stress, depression etc) भी झेलता है, तो बहुत संभव है कि वो सिर्फ ना तो किडनी, लीवर, हार्ट सम्बंधित अंगों का शीघ्र मरीज हो जाए बल्कि असमय आंशिक या पूर्ण रूप से नपुंसक (Impotent or eunuch) भी हो जाए |

👉क्योंकि बिना विशेष शारीरिक मेहनत के गरिष्ठ भोजन का नियमित सेवन वो भी पञ्च तत्वों से युक्त प्राकतिक वातावरण (शुद्ध पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, अग्नि) से दूर रहकर करने पर, मानव शरीर के शुक्राणुओं की गतिशीलता धीरे धीरे समाप्त होती जाती है, जिससे संतान पैदा होने में बाधा उत्पन्न होती है (शारीरिक मेहनत की कमी से उत्पन्न इस तरह की आंशिक नपुंसकता को, वापस शारीरिक मेहनत बढ़ाकर व कुछ योगासनों व आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाओं (herbal medicines or homeopathic medicines) के कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक सेवन कर निश्चित दूर किया जा सकता है) |

👉अन्न के बारे में आयुर्वेद महाग्रन्थ में एक संस्कृत श्लोक (in sanskrit documents) दिया गया है जिसका हिंदी में अर्थ होता है कि अगर “अन्न” को सही दिनचर्या के तहत खाया जाए तो वह आदमी के द्वारा खाया जाता है, लेकिन अगर दिनचर्या गलत हो तो “अन्न” खुद मानव को ही खाने लगता है अर्थात शरीर में कई तरह के रोग उत्पन्न करने लगता है |

👉अन्न निश्चित रूप से कंद, मूल, फलों की तुलना में ज्यादा शारीरिक ताकत (physical strength) प्रदान करता है लेकिन उस ज्यादा ताकत को लेने के बावजूद, 24 घंटा सिर्फ कुर्सी पर बैठकर या बिस्तर पर लेटकर ही नहीं बिता देना चाहिए, बल्कि उस ताकत को किसी भी तरह की शारीरिक मेहनत में खर्च भी करना चाहिए इसलिए अन्न खाने वालों सभी मानवों को रोज कम से कम आधा घंटा ऐसी कोई भी हार्ड एक्सरसाइज (hard gym exercise) अनिवार्य रूप से करनी चाहिए जिससे उनका पूरा शरीर पसीने से नहा जाए (लेकिन शरीर बीमार या कमजोर हो तो बिना चिकित्सक की सलाह के हार्ड एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए)|

👉यहाँ पर एक बात फिर से ध्यान से समझने वाली है कि अगर कोई व्यक्ति रोज गरिष्ठ अन्न खाता है तो उसके लिए सिर्फ योग प्राणायाम ध्यान (yoga pranayama meditation) करना ही पर्याप्त नहीं होता है क्योंकि सिर्फ योग प्राणायाम ध्यान के दम पर सिर्फ वही सच्चे योगी (Indian Yogi, Sadhu, Sant, sanyasi) अपने शरीर को स्वस्थ (healthy) रख सकतें है जो अन्न बिल्कुल नहीं खाते हैं और सिर्फ कन्द, मूल, फल (condyle, roots, fruits) आदि खाकर गुफाओं में तपस्या करतें हैं |

👉इसलिए जो गृहस्थ अन्न खातें उनके लिए यह अनिवार्य है कि वो 24 घंटे में कम से कम एक बार ऐसी कड़ी मेहनत करें कि उनका शरीर पसीने से नहा जाए और इस अनिवार्य हार्ड एक्सरसाइज को करने के बाद, अगर उनकी इच्छा दिव्य मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति (अर्थात ईश्वरत्व) की प्राप्ति से अपने पूर्ण कायाकल्प की हो तो उन्हें कम से कम रोज आधा घंटा योग प्राणायाम ध्यान भी जरूर करना चाहिए पर हार्ड फिजिकल एक्सरसाइज व योग प्राणायाम ध्यान (yog pranayam meditation) के बीच में कम से कम 7 मिनट का गैप होना चाहिए !

👉आप चाहें तो इस गैप का सदुपयोग ध्यान करने में कर सकतें हैं (सभी योग प्राणायाम ध्यान की क्रिया विधि व सावधानियां आप इस लेख के नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक कर जान सकतें हैं) !

👉4 – किडनी की बीमारी होने का चौथा कारण है अनुवांशिक अर्थात पूर्वजों के द्वारा इस बीमारी का जींस के माध्यम से वंशजों में ट्रान्सफर होना (genes carry genetic diseases) | इस तरह के मरीज रेयर देखने को मिलतें हैं और इस तरह की बिमारी को पैदा होने से रोका भी नहीं जा सकता है, पर हाँ इस कारण से या ऊपर लिखे किसी भी अन्य कारण से किडनी में उत्पन्न बीमारी को निश्चित ठीक करने के लिए प्रयास जरूर किया जा सकता है और उस प्रयास से सम्बंधित कार्य निम्नलिखित हैं –

👉भारतीय देशी गाय माता के दूध से बने छाछ का अधिक से अधिक सेवन करें ! अगर भारतीय देशी गाय माता के दूध से बने छाछ के मिलने की संभावना बिल्कुल ना हो तो भैंस के दूध की छाछ भी लिया जा सकता है ! पर जर्सी गाय के दूध के किसी भी सामग्री का इस्तेमाल ना करें क्योंकि यह बहुत हानिकारक है (butter milk of only indian deshi cow, or buffalo milk, but not of jarsi cow milk) !

👉वास्तव में छाछ किडनी के लिए साक्षात अमृत समान है जिसकी वजह से यह किडनी से सम्बंधित लगभग हर बीमारी में बहुत ही जबरदस्त फायदा पहुचाता है ! इसलिए घर पर दूध से दही जमाकर उसका मक्खन निकालकर, ताजा छाछ तुरंत मरीज को पीने के लिए दें ! छाछ में एक चुटकी काला नमक व जीरा मिला सकतें हैं और छाछ सिर्फ दिन में ही पीना चाहिए, सूरज ढ़लने के बाद नहीं पीना चाहिए ! सिर्फ घर का बना छाछ दें, ना कि बाजार में बिकने वाली छाछ क्योंकि इसमें सडन से बचाव के लिए केमिकल युक्त प्रिजर्वेटिव (chemical preservatives) की मिलावट होती है !

👉छाछ के अलावा कुछ ऐसे विशेष योगासन व प्राणायाम का भी अभ्यास रोज नियम से करना है जिनके अंदर इतनी ताकत होती है कि तेजी से ख़राब होती किडनी को भी पूरी तरह से फेल होने से बचा लेतें हैं और साथ ही साथ कुछ महीने से लेकर कुछ वर्षों तक में किडनी को वापस पहले की तरह ठीक भी कर देतें हैं !

👉इन योगासन व प्राणायाम को अपनी किडनी की खराबी के गंभीरता के हिसाब से प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट से लेकर अधिकतम जितना देर तक चाहें उतनी देर तक कर सकतें हैं (किसी भी योगासन व प्राणायाम का अभ्यास धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए, नहीं तो शरीर में खिचाव आ सकता है) ! वे योगासन व प्राणायाम (yog asan and pranayam) हैं –

👉गोमुखासन (gomukhasana), वज्रासन (vajrasana), कपालभाति प्राणायाम (kapalbhati pranayama) व अनुलोमविलोम प्राणायाम (anulom vilom pranayama) !

👉इसमें से सिर्फ वज्रासन (vajrasana) को दोपहर और रात के खाने के तुरंत बाद करना चाहिए, बाकि सब योगासन व प्राणायाम (yoga asana and pranayama) को सुबह व शाम खाली पेट करना चाहिए !

👉इन सारे प्रयासों को करने से निश्चित रूप से चमत्कारी लाभ मिलता है बशर्ते इन्हें नियमित रूप से लम्बे समय तक निभाया जाए क्योंकि किडनी जैसे मजबूत अंग ख़राब होने में जैसे समय लगातें हैं ठीक उसी तरह इन्हें पूरी तरह से ठीक होने में भी काफी समय लग जाता है इसलिए बिना धैर्य खोये हुए और सभी परहेजों का सख्ती से पालन करते हुए इन प्रयासों को नियमित रूप से निभाना चाहिए जिससे सफलता मिलने की 100 प्रतिशत संभावना निश्चित बन जाती है !

👉कुछ किडनी के मरीज ऐसे भी होतें हैं जिन्हें पता होता है कि उनकी खाने पीने की गलत आदत की वजह से उनकी किडनी रोज पहले से ज्यादा ख़राब होती जा रही है लेकिन उसके बावजूद भी वे अपने जीभ के चटोरेपन की आदत के आगे बार बार हार मान जाते हैं और अक्सर ऐसी चीज खा या पी लेते हैं जो उनकी किडनी को बहुत नुकसान पहुचाती है ।

Friday, 25 May 2018

बढ़ती उम्र पर जॉर्ज कार्लिन की सलाह कैसे बने रहें - चिरयुवा

1. फालतू की संख्याओं को दूर फेंक आइए। जैसे- उम्र, वजन, और लंबाई। इसकी चिंता डॉक्टर को करने दीजिए। इस बात के लिए ही तो आप उन्हें पैसा देते हैं।
2. केवल हँसमुख लोगों से दोस्ती रखिए। खड़ूस और  चिड़चिड़े लोग तो आपको नीचे गिरा देंगे।
3. हमेशा कुछ सीखते रहिए। इनके बारे में कुछ और जानने की कोशिश करिए - कम्प्यूटर, शिल्प, बागवानी, आदि कुछ भी। चाहे रेडियो ही। दिमाग को निष्क्रिय न रहने दें। खाली दिमाग शैतान का घर होता है और उस शैतान के परिवार का नाम है - अल्झाइमर मनोरोग।
4. सरल व साधारण चीजों का आनंद लीजिए।
5. खूब हँसा कीजिए - देर तक और ऊँची आवाज़ में।
6. आँसू तो आते ही हैं। उन्हें आने दीजिए, रो लीजिए, दुःख भी महसूस कर लीजिए और फिर आगे बढ़ जाइए। केवल एक व्यक्ति है जो पूरी जिंदगी हमारे साथ रहता है - वो हैं हम खुद। इसलिए जबतक जीवन है तबतक 'जिन्दा' रहिए।
7. अपने इर्द-गिर्द वो सब रखिए जो आपको प्यारा लगता हो - चाहे आपका परिवार, पालतू जानवर, स्मृतिचिह्न-उपहार, संगीत, पौधे, कोई शौक या कुछ भी। आपका घर ही आपका आश्रय है।
8. अपनी सेहत को संजोइए। यदि यह ठीक है तो बचाकर रखिए, अस्थिर है तो सुधार करिए, और यदि असाध्य है तो कोई मदद लीजिए।
9. अपराध-बोध की ओर मत जाइए। जाना ही है तो किसी मॉल में घूम लीजिए, पड़ोसी राज्यों की सैर कर लीजिए या विदेश घूम आइए। लेकिन वहाँ कतई नहीं जहाँ खुद के बारे में खराब लगने लगे।
10. जिन्हें आप प्यार करते हैं उनसे हर मौके पर बताइए कि आप उन्हें चाहते हैं; और हमेशा याद रखिए  कि जीवन की माप उन साँसों की संख्या से नहीं होती जो हम लेते और छोड़ते हैं बल्कि उन लम्हों से होती है जो हमारी सांस लेकर चले जाते हैं

हमें प्रतिदिन का जीवन भरपूर तरीके से जीने की आवश्यकता है।

जीवन की यात्रा का अर्थ यह नहीं कि अच्छे से बचाकर रखा हुआ आपका शरीर सुरक्षित तरीके से श्मशान या कब्रगाह तक पहुँच जाय। बल्कि आड़े-तिरछे फिसलते हुए, पूरी तरह से इस्तेमाल होकर, सधकर, चूर-चूर होकर यह चिल्लाते हुए पहुँचो - वाह यार, क्या यात्रा थी!

*प्रकृति का कालचक्र नियम देखिए*
1~ बचपन:- समय है, शक्ति है,
      लेकिन पैसा नहीं है ..
2~ युवावस्था:- शक्ति है, पैसा है,
      लेकिन समय नहीं है ..
3~ बुढ़ापा:- पैसा है, समय है,
      लेकिन शक्ति नहीं है ..     
*प्रकृति का कोई जबाब नहीं इसलिए प्रतिदिन हर्ष .. उल्लास .. और खुशी*
*में जीवन बिताएं।*
       
*• गौतम बुद्ध के सुविचार •*
.... जो गुजर गया उसके बारे में मत सोचो और भविष्य के सपने मत देखो केवल वर्तमान पे ध्यान केंद्रित करो ।
.... आप पूरे ब्रह्माण्ड में कहीं भी ऐसे व्यक्ति को खोज लें जो आपको आपसे ज्यादा प्यार करता हो, आप पाएंगे कि जितना प्यार आप खुद से कर सकते हैं उतना कोई आपसे नहीं कर सकता।
            
.... स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन और विश्वास सबसे अच्छा संबंध।
             
.... हमें हमारे अलावा कोई और नहीं बचा सकता, हमें अपने रास्ते पे खुद चलना है।
           
.... तीन चीज़ें ज्यादा देर तक नहीं छुपी रह सकतीं – सूर्य, चन्द्रमा और सत्य
              
.... आपका मन ही सब कुछ है, आप जैसा सोचेंगे वैसा बन जायेंगे ।
             

.... अपने शरीर को स्वस्थ रखना भी एक कर्तव्य है, अन्यथा आप अपनी मन और सोच को अच्छा और साफ़ नहीं रख पाएंगे ।
              

.... हम अपनी सोच से ही निर्मित होते हैं, जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं। जब मन शुद्ध होता है तो खुशियाँ परछाई की तरह आपके साथ चलती हैं ।
             ... किसी परिवार को खुश, सुखी और स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरुरी है अनुशासन और मन पर नियंत्रण अगर कोई व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण कर ले तो उसे आत्मज्ञान का रास्ता मिल जाता है ।
                .. क्रोध करना एक गर्म कोयले को दूसरे पे फैंकने के समान है जो पहले आपका ही हाथ जलाएगा ।
              .. जिस तरह एक मोमबत्ती की लौ से हजारों मोमबत्तियों को जलाया जा सकता है फिर भी उसकी रौशनी कम नहीं होती उसी तरह एक दूसरे से खुशियाँ बांटने से कभी खुशियाँ कम नहीं होतीं ।
              .... इंसान के अंदर ही शांति का वास होता है, उसे बाहर ना तलाशें ।
              ... आपको क्रोधित होने के लिए दंड नहीं दिया जायेगा, बल्कि आपका क्रोध खुद आपको दंड देगा ।
            ... हजारों लड़ाइयाँ जितने से बेहतर है कि आप खुद को जीत लें, फिर वो जीत आपकी होगी जिसे कोई आपसे नहीं छीन सकता ना कोई स्वर्गदूत और ना कोई राक्षस ।
            .... जिस तरह एक मोमबत्ती बिना आग के खुद नहीं जल सकती उसी तरह एक इंसान बिना आध्यात्मिक जीवन के जीवित नहीं रह सकता ।
           .... निष्क्रिय होना मृत्यु का एक छोटा रास्ता है, मेहनती होना अच्छे जीवन का रास्ता है, मूर्ख लोग निष्क्रिय होते हैं और बुद्धिमान लोग मेहनती ।
          ... हम जो बोलते हैं अपने शब्दों को देखभाल के चुनना चाहिए कि सुनने वाले पे उसका क्या प्रभाव पड़ेगा,
अच्छा या बुरा ।
.... आपको जो कुछ मिला है उस पर घमंड ना करो और ना ही दूसरों से ईर्ष्या करो, घमंड और ईर्ष्या करनेवाले लोगों को कभी मन की शांति नहीं मिलती ।
.... अपनी स्वयं की क्षमता से काम करो, दूसरों pr निर्भर मत रहो ।
..... असल जीवन की सबसे बड़ी विफलता है हमारा असत्यवादी होना ।

Thursday, 24 May 2018

Posstive thought

जीवन में वो ही व्यक्ति असफल होते है, जो सोचते है पर करते नहीं ।
1:-"परिवर्तन कभी भी पीड़ादायक नहीं होता, केवल परिवर्तन का विरोध पीड़ादायक होता है।
2:- सफलता का आधार है सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास !!!
3:- अतीत के ग़ुलाम नहीं बल्कि भविष्य के निर्माता बनो…
4 :- अतीत के ग़ुलाम नहीं बल्कि भविष्य के निर्माता बनो…
5 :- मेहनत इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे…
6 :- कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है, लोग तो पीछे तब आते है जब हम कामयाब होने लगते है.
7 :- छोड़ दो किस्मत की लकीरों पे यकीन करना, जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज़ है…
8 :- यदि हार की कोई संभावना ना हो तो जीत का कोई अर्थ नहीं है…
9 :- समस्या का नहीं समाधान का हिस्सा बने…
10 :- जिनको सपने देखना अच्छा लगता है उन्हें रात छोटी लगती है और जिनको सपने पूरा करना अच्छा लगता है उनको दिन छोटा लगता है…
11 :- आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर आप अपनी आदतें बदल सकते है और निशचित रूप से आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देगी !
12 :- एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जानें के बाद दूसरा सपना देखने के हौसले को ज़िंदगी कहते है !!!
13 :- वो सपने सच नहीं होते जो सोते वक्त देखें जाते है, सपने वो सच होते है जिनके लिए आप सोना छोड़ देते है…
14 :- सफलता का चिराग परिश्रम से जलता है !!!
15 :- जिनके इरादे बुलंद हो वो सड़कों की नहीं आसमानो की बातें करते है…
16 :- सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं…
17 :- मैं तुरंत नहीं लेकिन निश्चित रूप से जीतूंगा…
18 :- सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगें लोग…
19 :- आशावादी हर आपत्तियों में भी अवसर देखता है और निराशावादी बहाने !!!
20 :- आप में शुरू करने की हिम्मत है तो, आप में सफल होने के लिए भी हिम्मत है…
21 :- सच्चाई वो दिया है जिसे अगर पहाड़ की चोटी पर भी रख दो तो बेशक रोशनी कम करे पर दिखाई बहुत दूर से भी देता है.
22 :- संघर्ष में आदमी अकेला होता है, सफलता में दुनिया उसके साथ होती है ! जिस जिस पर ये जग हँसा है उसी उसी ने इतिहास रचा है.
23 :- खोये हुये हम खुद है और ढूढ़ते ख़ुदा को है !!!
24 :- कामयाब लोग अपने फैसले से दुनिया बदल देते है और नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल लेते है…
25 :- भाग्य को और दूसरों को दोष क्यों देना जब सपने हमारे है तो कोशिशें भी हमारी होनी चाहियें !!!
26 :- यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सिखा देती है !!!
27 :- झूठी शान के परिंदे ही ज्यादा फड़फड़ाते है तरक्की के बाज़ की उड़ान में कभी आवाज़ नहीं होती…
28 :- समस्या का सामना करें, भागे नहीं, तभी उसे सुलझा सकते हैं…
29 :- परिवर्तन से डरना और संघर्ष से कतराना मनुष्य की सबसे बड़ी कायरता है.
30 :- सुंदरता और सरलता की तलाश चाहे हम सारी दुनिया घूम के कर लें लेकिन अगर वो हमारे अंदर नहीं तो फिर सारी दुनिया में कहीं नहीं है.
31 :- ना किसी से ईर्ष्या ना किसी से कोई होड़, मेरी अपनी मंज़िलें मेरी अपनी दौड़…
32 :- ये सोच है हम इंसानों की कि एक अकेला क्या कर सकता है, पर देख ज़रा उस सूरज को वो अकेला ही तो चमकता है !!!
33 :- लगातार हो रही सफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि कभी कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है…
34 :- जल्द मिलने वाली चीजें ज्यादा दिन तक नहीं चलती और जो चीजें ज्यादा दिन तक चलती है वो जल्दी नहीं मिलती है.
35 :- इंसान तब समझदार नहीं होता जब वो बड़ी बड़ी बातें करने लगे, बल्कि समझदार तब होता है जब वो छोटी छोटी बातें समझने लगे…
36 :- सेवा सभी की करना मगर आशा किसी से भी ना रखना क्योंकि सेवा का वास्तविक मूल्य नही दे सकते है,
37 :- मुश्किल वक्त का सबसे बड़ा सहारा है “उम्मीद” !! जो एक प्यारी सी मुस्कान दे कर कानों में धीरे से कहती है “सब अच्छा होगा” !!
38 :- दुनिया में कोई काम असंभव नहीं, बस हौसला और मेहनत की जरुरत है !!!
39 :- वक्त आपका है चाहे तो सोना बना लो और चाहे तो सोने में गुजार दो, दुनिया आपके उदाहरण से बदलेगी आपकी राय से नहीं…
40 :- बदलाव लाने के लिए स्वयं को बदले…
41 :- सफल व्यक्ति लोगों को सफल होते देखना चाहते है, जबकि असफल व्यक्ति लोगों को असफल होते देखना चाहते है…
42 :- घड़ी सुधारने वाले मिल जाते है लेकिन समय खुद सुधारना पड़ता है !!!
43 :- दुनिया में सब चीज मिल जाती है केवल अपनी ग़लती नहीं मिलती…
44 :- क्रोध और आंधी दोनों बराबर… शांत होने के बाद ही पता चलता है की कितना नुकसान हुवा…
45 :- चाँद पे निशान लगाओ, अगर आप चुके तो सितारों पे तो जररू लगेगा !!!
46 :- गरीबी और समृद्धि दोनों विचार का परिणाम है…
47 :- पसंदीदा कार्य हमेशा सफलता, शांति और आनंद ही देता है…
48 :- जब हौसला बना ही लिया ऊँची उड़ान का तो कद नापना बेकार है आसमान का…
49 :- अपनी कल्पना को जीवन का मार्गदर्शक बनाए अपने अतीत को नहीं…
50 :- समय न लागओ तय करने में आपको क्या करना है, वरना समय तय कर लेगा की आपका क्या करना है.
51 :- अगर तुम उस वक्त मुस्कुरा सकते हो जब तुम पूरी तरह टूट चुके हो तो यकीन कर लो कि दुनिया में तुम्हें कभी कोई तोड़ नहीं सकता !!!
52 :- कल्पना के बाद उस पर अमल ज़रुर करना चाहिए। सीढ़ियों को देखते रहना ही पर्याप्त नहीं है, उन पर चढ़ना भी ज़रुरी है।
53 :- हमें जीवन में भले ही हार का सामना करना पड़ जाये पर जीवन से कभी नहीं हारना चाहिए…
54 :- सीढ़ियां उन्हें मुबारक हो जिन्हें छत तक जाना है, मेरी मंज़िल तो आसमान है रास्ता मुझे खुद बनाना है !!!
55 :- हजारों मील के सफ़र की शुरुआत एक छोटे कदम से होती है…
56 :- मनुष्य वही श्रेष्ठ माना जाएगा जो कठिनाई में अपनी राह निकालता है ।
57 :- पुरुषार्थ से असंभव कार्य भी संभव हो जाता है…
58 :- प्रतिबद्ध मन को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, पर अंत में उसे अपने परिश्रम का फल मिलेगा ।
59 :- असंभव समझे जाने वाला कार्य संभव करके दिखाये, उसे ही प्रतिभा कहते हैं ।
60 :- आने वाले कल को सुधारने के लिए बीते हुए कल से शिक्षा लीजिए…
61 :- जो हमेशा कहे मेरे पास समय नहीं है, असल में वह व्यस्त नहीं बल्कि अस्त-व्यस्त है ।
62 :- कठिनाइयाँ मनुष्य के पुरुषार्थ को जगाने आती हैं…
63 :- क्रोध वह हवा है जो बुद्धि के दीप को बुझा देती है ।
64 :- आपका भविष्य उससे बनता है जो आप आज करते हैं, उससे नहीं जो आप कल करेंगे…
65 :- बन सहारा बे सहारों के लिए बन किनारा बे किनारों के लिए, जो जिये अपने लिए तो क्या जिये जी सको तो जियो हजारों के लिए ।
66 :- चाहे हजार बार नाकामयाबी हो, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ लगे रहोगे तो अवश्य सफलता तुम्हारी है…
67 :- खुद की तरक्की में इतना समय लगा दो, कि किसी और की बुराई का वक्त ही ना मिले !!!
68 :- प्रगति बदलाव के बिना असंभव है, और जो अपनी सोच नहीं बदल सकते वो कुछ नहीं बदल सकते…
69 :- खुशी के लिए काम करोगे तो ख़ुशी नहीं मिलेगी, लेकिन खुश होकर काम करोगे, तो ख़ुशी और सफलता दोनों ही मिलेगी ।
70 :- पराजय तब नहीं होती जब आप गिर जाते हैं, पराजय तब होती है जब आप उठने से इनकार कर देते।..............

Sunday, 6 May 2018

अमरूद

स्वास्थ्यरच्छक -- अमरूद

🌓सेब के समस्त गुण होने एवं अन्य फलों की तुलना में सस्ता होने से अमरूद गरीबों का सेब कहलाता है ।। संस्कृत में इसे अमृतफल कहा जाता है ।। हिन्दी मे अमरूद,, मराठी मे जामफल,, साउथ में पेरू कहा जाता है ।। इसकी कई प्रजातियाँ होती हैं परन्तु मुख्य रूप से गुलाबी और सफेद दो प्रकार का होता है जिसका गूदा अंदर से गुलाबी,, उसे गुलाबी और जिसका गूदा सफेद होता है उसे सफेद अमरूद कहते हैं ।।

गुण -- दोष

जठराग्नि तेज करता है ।।
रुचिकारक,, शूक्रवर्धक,, कब्जनिवारक रेचक होता है ।।
मानसिक शक्ति बढ़ाता है ।।
हृदय के लिए बलवर्धक होता है ।।
कफ निस्सारक,, उलटी एवं चक्कर दूर करता है ।।
तृषा का समन करता है ।। वात पित्त दोष नष्ट करता है ।।
शीतल होने से मानसिक विकृति दूर करता है ।। दाहनाशक होता है ।।
संग्रहणी बवासीर आँवयुक्त दस्त मे भोजन के साथ कम मात्रा में देने से लाभकारक होता है ।। प्रोटीन,, कार्बोहाइट्रेट तथा विटामिन ए,, बी,, सी तथा फास्फोरस एवं कैल्शियम आदि खनिज लवण पाए जाते हैं ।।
अमरूद सेवन का उचित समय सुबह नौ बजे,, दोपहर के भोजन के बाद होता है ।।
बीज कब्ज निवारक होते हैं ।। आँतों की सफाई का काम करते हैं ।। अधिक सेवन करने से अजीर्ण होने पर गुड़ खाने से लाभ होता है ।।

घरेलू उपचार मे उपयोग

★दाँतों का दर्द,,  मसूड़ों की सूजन-- अमरुद के १५-२० मुलायम पत्ते मसलकर २१ गिलास पानी में उबालें, जब पानी आधा रह जाए तो मामूली ठंढ़ा करके ३ ग्राम सेंधा नमक एवं एक ग्राम फिटकरी डालकर दिन में ४-५ बार कुल्ला करने से ३-४ दिन में लाभ होता है!!

★गुदभ्रंश में--- १५-२० मुलायम पत्ते पीसकर गुदा पर कपड़े से बाँधने से बढ़ी हुई सूजन कम होती है तथा बाहर निकला हुआ गुदा अपने स्थान पर आ जाता है,, पत्तों का काढा बनाकर गुदा को धोने से लाभ होता है!! नियमित प्रयोग करना चाहिए!! संकोचक गुण की वजह से लाभ मिलता है!! धोते समय गुदा को अंदर की तरफ धकेलना चाहिए!!

★मुख के छालों में-- अमरूद के पत्तों पर कत्था लगाकर चबाएँ!! केवल पत्तों को चबाने से भी लाभ होता है!! पत्तों और एक ग्राम फिटकरी का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से लाभ होता है!!

★भाँग के नशा में-- नशा चढ़ने पर पके अमरूद खिलाना चाहिए!!  अमरूद न होने पर पत्तों का रस पिलाना चाहिए!!

★हैजा की आरम्भिक अवस्था में-- छाल का या पत्तों का काढ़ा ५० ग्राम उलटी,, दस्त बंद हो जाता है!!

★आँख आने पर--- नरम पत्तों का पुल्टिस बाँधने से दर्द,, सूजन,, लालिमा ठीक होता है!!

★पागलपन में-- नियमित अमरूद खिलाना चाहिए,, काढ़ा ५०-५० ग्राम पिलाने से रोग वृद्धि रुक जाती है!! लाभ होता है!!

★बच्चों के पुराने दस्त में-- २०० ग्राम जड़ की छाल उबालें,, आधा रहने पर ,, ठंढ़ा करके ३-४ बार पिलाने से लाभ होता है!!

★हृदय रोग में-- अमरूद की चटनी लाभप्रद होती है!! बीज निकालकर चटनी बना कर सेवन करें!!

★ज्वर में--- १५-२० पत्तों को पीसकर,, छानकर पिलाने से ज्वर के उपद्रव दूर होते हैं!!

★तृषा में-- मधुमेहजन्य बहुमूत्र  के रोग से उत्पन्न प्यास,, मुँह सूखने के लच्छणों में १०० ग्राम अमरूद को२०० ग्राम पानी में उबालें!! २० मिनट बाद छानकर रोगी को पिलाने से लाभ होता है!!

★पानी जैसे दस्त होने पर अमरूद का मुरब्बा सेवन करना चाहिए!!

★पित्त के बढ़ने से जलन पर अमरूद के बीज निकालकर मिश्री मिलाकर,, पीसकर सेवन करने से पित्त प्रकोप शांत होता है!!

★आधाशीशी दर्द में--
आधे सिर में दर्द होने पर सूर्योदय से पहले कच्चे ताजे अमरूद को पीसकर माथे पर लेप लगाने से कुछ दिनों में पूर्ण लाभ होता है!!

★सूखी खाँसी में-- खाली पेट अमरूद खाने से ३-४ दिनों में खाँसी दूर होगी और कफ निकल जाएगी!!

★अजीर्ण होने पर--- १५-२० कोमल पत्तों का रस निकालकर थोड़ी मिश्री मिलाकर १५ दिन तक पिलाने से लाभ होता है!